How to strengthen family ties ? परिवारिक संबंधों को मजबूत कैसे बनाएं ?

Share:

आखिर वह क्या चीज है, जो परिवार के संबंध सूत्रों को मजबूत बनाती है ? क्या सिर्फ रिश्ते ? नहीं, वह चीज है सुख - दुख की ज्यादा से ज्यादा साझेदारी और निकटता, लेकिन क्या इस युग में ऐसा हो पा रहा है ? आज लोग अपने कार्योंं में इतने व्यस्त हो गए हैं और अपनी भावनाओं में इतने अकेले पड़ गए हैं, कि परिवार में आपस में मिल बैठकर बातचीत करने के लिए न उनके पास समय है और न इच्छा ही। फलतः बढ़ते तनावों के साथ लोगों के परिवार के भीतर ही ज्यादा अलग - थलग पड़ने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। परिवार को मजबूत बनाने के लिए पारिवारिक संबंधों की एक ऐसी मजबूत दीवार होनी चाहिए, जो कि परिवार को न सिर्फ बाहरी दुनिया से बचाए बल्कि परिवार को एक अलग पहचान और शक्ति भी दे। संबंधों की ये दीवारें ऐसी कमजोर न हों, कि बाहर की दखलअंदाजी और दबाव घर की दीवारों को भेदकर पारिवारिक संबंधों को छिन्न - भिन्न कर दे।
After all, what is it that strengthens the bonding in a family? Is it only relationships? Well no, it is more and more sharing and closeness of happiness and sorrow, but is this happening in this age? Today people have become so busy in their work and are so lonely in their feelings that they neither have time nor desire to sit and talk with each other in the family. As a result, with rising tensions, people are increasingly likely to become more isolated within the family. To make the family strong, there should be such a strong wall of family relations, which not only protects the family from the outside world but also gives a different identity and strength to the family. These walls of relations should not be so weak that outside interference and pressure break the family relations by penetrating the walls of the house.

संबंधों के इस दुर्ग को अभेद्य इस तरह बनाएं –

Make this fortress of relations impenetrable in this way –

समय: आज के माता पिता पहले की तुलना में बहुत कम समय अपने बच्चों को दे पाते हैं जबकि आज बच्चों को माता पिता के साथ की और भी ज्यादा जरूरत है। कारण, एक तो परिवारों के छोटे होने से बच्चों को माता पिता के अलावा और बड़ों का साथ नहीं मिलता और दूसरे बच्चों की समस्याएं पहले की तुलना में अब ज्यादा बढ़ गई है।
एक काम काजी मां का कहना है, “हमारा दिन भर का समय बाहरी तरह – तरह के कामों में इतना बंटा हुआ है, कि हमें पता ही नहीं लगता कि कब सुबह हो रही है और कब शाम। हमारी व्यस्तता ने हमारे जीवन के सारे आनंद को कैद कर लिया है।“
परिवार को ज्यादा समय दें। पारिवारिक सदस्यों के व्यक्तिगत क्रिया – कलापों पर कुछ इस प्रकार से रोक लगाएं कि पूरा एक दिन परिवार के लिए छोड़ दें और खाने का एक ऐसा समय निश्चित करें जिसमें ज्यादा से ज्यादा सदस्य उपस्थित हों। जब परिवार के अधिकांश सदस्य घर में उपस्थित हों, तो टीवी रेडियो कुछ समय के लिए बंद कर दिया जाए, जिससे सब आपस में बातचीत कर सकें। परिवार के लिए ज्यादा समय बचाने के लिए घर के काम मिल जुलकर करें। कामों को बांटने के बजाए उन्हें मिलकर करें।
छोटे – छोटे कार्यों को हम छोटी – छोटी खुशियों और उत्सव में बदल सकते हैं बशर्ते परिवार के सदस्य उत्साह से किसी काम को अर्थवान बनाएं। जैसे, सोने से पहले बच्चे और माता पिता अपनी बातों का आदान प्रदान करें। बच्चे थोड़े बड़े हों, तो उनसे सामान्य ज्ञान से संबंधित पहेलियां पूछी जा सकती हैं। इसी तरह से सुबह बच्चों को तैयार करते हुए या शाम को टहलते हुए या किताबें पढ़कर आपस में सुनाते हुए परिवार के समय में सबको शामिल किया जा सकता है।

Time: Today’s parents are able to give very less time to their children than before, whereas today children need more time from their parents. Due to the small family these days, the children do not get the support of the elders other than the parents and the problems of the children have increased more than before.
A working mother says, “Our whole day’s time is so divided into various types of external work, that we do not even know when it is morning and when it is evening. Our busyness has captured all the joy of our lives.”
Give more time to family. Limit the personal activities of family members in such a way that one whole day is left for the family and fix a meal time in which maximum number of members are present. When most of the family members are present in the house, the TV, internet, etc should be turned off for some time so that everyone can talk to each other. Do household chores together to save more time for the family. Instead of dividing the tasks, do them together.
We can convert small tasks into small joys and celebrations provided the family members enthusiastically make any work meaningful. For example, before sleeping, the child and the parent should exchange their words. If the children are a little older, then they can be asked general knowledge related puzzles. Similarly, everyone can be involved in family time while preparing the children in the morning or taking a walk in the evening or reading books to each other.

स्थान: स्वाति ने जब दो कमरे के छोटे से फ्लैट को छोड़कर पांच कमरों के बड़े से मकान में शिफ्ट किया, तो उसकी बिटिया इस नए मकान में आकर बिल्कुल भी खुश न थी और एक दिन मम्मी डैडी से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उसने कह भी दिया, “ पहले वाला मकान ज्यादा अच्छा था, वहां तो सोने तक मझे अपने कमरे में आपकी आवाजें सुनाई पड़ती थीं, लेकिन यहां तो अपने कमरे में बैठकर मझे बहुत डर लगता है। कोई भी आवाज सुनाई नहीं पड़ती।“ छोटा घर इसलिए बच्चों के लिए ज्यादा सुखद और आरामदायक होता है क्योंकि उन्हें अलग – थलग पड़े कमरों में नहीं रहन पड़ता और उन्हें अपने खेल – खिलौनों से लेकर मम्मी पापा तक सब आस – पास ही मिल जाते हैं। सुविधा के अनुसार कुछ समय सप्ताह में एक दिन अवश्य निकालिए जिसमें आप सब बाहर घूमने जाएं। इससे पारिवारिक संबंधों में उत्साह, ऊर्जा और नवीनता आती है। घूमने के स्थल पार्क, चिड़ियाघर, संग्रहालय, मंदिर कोई दर्शनीय स्थल या पारिवारिक मित्र का घर भी हो सकता है।

Location: When Swati left a small two-room flat and shifted to a bigger five-room house, her daughter was not at all happy to come to this new house and one day expressing her displeasure with her mother and father, Diya said , “The earlier house was better, there I could hear your voices in my room till I slept, but here I am very scared sitting in my room. No sound is heard.” A small house is more pleasant and comfortable for children because they do not have to live in isolated rooms and they can find everything from their toys to mom and dad . According to the convenience, you must take out some time a day in a week in which you all go out for a walk. This brings enthusiasm, energy and innovation in family relations. Places to visit can be a park, a zoo, a museum, a temple, a sightseeing spot or even a family friend’s house.

रूचियां: परिवार में कोई ऐसी हाॅबी पैदा की जा सकती है, जिसमें अधिकांश सदस्य भाग ले सकें। जैसे बेडमिंटन, टेबिल टेनिस, कैरम, शतरंज या ताश का खेल। कोई कला जैसे संगीत या चित्रकला। बागवानी, पालतू पशु – पक्षी पालना जैसा शौक भी अपनाया जा सकता है, क्योकि इन कार्यों में भी घर के सदस्य आपस में अपनी रूचि, अनुभव और आनंद को आपस में बांटते हैं।

Interest: Such a hobby can be created in the family in which most of the members can participate. Like playing badminton, table tennis, carrom, chess or card games. An art such as music or painting. Hobbies like gardening, pet-bird rearing can also be adopted, because even in these works, the members of the household share their interest, experience and joy among themselves.

उत्सव: बिना पारिवारिक उत्सवों के समय अर्थहीन और नीरस सा गुजरता रहता है। या यों कहिए कि हम अपने साल भर के समय को कुछ खास उत्सवों के बीच बांटकर ही देखना चाहते हैं। इन उत्सवों में आते हैं पारिवारिक और धार्मिक उत्सव। आमतौर पर पारिवारिक उत्सवों के तौर पर लोग जन्मदिन मनाते हैं। पर आजकल जन्मदिन केक और उपहार की औपचारिकता तक ही सीमित रह जाते हैं। आज के नीरस जीवन में जबकि सामाजिक और सामुदायिक उत्सव नाम मात्र के रह गए हैं, परिवार के उत्सवों के लिए ज्यादा से ज्यादा मौके ढूंढ़ें। इसके लिए बच्चों के स्कूल के पहले दिन से लेकर रिजल्ट मिलने तक की कई महत्वपूर्ण तिथियों को उत्सवों का रूप दिया जा सकता है। ऐसे ही और भी मौके तलाशे जा सकते हैं।

Festivities: Without family celebrations, the time goes on meaningless and monotonous. Or rather, we want to see the time of our year divided between some special festivals. These festivals include family and religious festivals. Generally, people celebrate birthdays as family celebrations. But nowadays, birthdays are confined to the formality of cakes and gifts. In today’s monotonous life, when social and community celebrations are no longer in name, find as many opportunities as possible for family celebrations. For this, many important dates from the first day of school to getting the results of the children can be given the form of celebrations. More such opportunities can be explored.

रिश्तेदारियां: परिवार के संबंधों को मजबूत बनाने के लिए और साथ ही परिवार के क्षेत्र को और विस्तार देने के लिए जरूरी है कि यदा कदा निकट के रिश्तेदारों से मिला जाए। माता पिता बच्चों को अपने बचपन के शहर, घर और स्कूलों को दिखलाएं। दादा दादी, नाना नानी से बच्चों को मिलवाते रहें। परिवार की सामाजिक पृष्टभूमि और बाहरी रिश्तों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, उतना ही परिवार के सदस्य भी सुरक्षित महसूस करेंगे।

Kinship: In order to strengthen family ties as well as to further expand the family’s sphere, it is necessary to meet with close relatives occasionally. Parents show their children the city, home and schools of their childhood. Keep introducing the children to grandparents, maternal grandparents. The stronger the family’s social background and the stronger the roots of external relationships, the more secure the family members will feel.

कहानियां: हर परिवार के पास ऐसी कुछ कहानियां होती हैं, जिन्हें परिवार में बार बार सुनकर पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। हर परिवार के अपने कुछ हंसी मजाक और ठहाकों की खास कहानियां चुटकुले होते हैं, जिन्हें सिर्फ परिवार के भीतर ही समझा जाता है और वे सिर्फ परिवार के मनोरंजन के लिए ही होते हैं। उन्हीं कहानियों के माध्यम से हर परिवार की खास संस्कृति और एक खास इतिहास पीढ़ी दर पीढी़ आगे बढते हैं। इन कहानियों को सुनकर बच्चों का व्यक्तित्व पारिवारिक सांचे में ढलता है, क्योंकि उन्हें लगता है जब उनके माता पिता ने कष्ट झेले हैं, तो वे भी झेल सकते हैं। इन्हीं कहानियों में कुछ कहानियां परिवार की गौरव गाथा को लेकर होती हैं और साथ ही कुछ कहानियां परिवार के अपने खास दुख दर्द के इतिहासों के बारे में होती हैं।

Stories: Every family has some such stories, which brings back old memories by listening to them again and again in the family. Every family has its own special stories of jokes and laughter, sweet memories, which are understood only within the family and they are only for family entertainment. Through those stories, the special culture and a special history of every family are passed on from generation to generation. Hearing these stories, the personality of the children is moulded into the family mould, because they feel that when their parents have suffered, they too can bear it. In these stories, some stories are about the pride of the family and at the same time some stories are about the history of the family’s own special pain and sorrow.

पर यह सब सुनना सुनाना तभी संभव है, जब परिवार के सदस्य अक्सर साथ उठें – बैठें और परिवार में रूचि लें। आदर्श बात यह है कि परिवार में रूचि लीजिए और परिवार को रूचिकर बनाइए।

But listening to all this is possible only when the family members often get up together – sit and take interest in the family. Ideally, take an interest in the family and make the family interesting.


                                                               अनामिका / Anamika


Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *