सुखमय वैवाहिक जीवन के लाइफ/For a happy married life

विवाह अधिकांशतः दो नितांत अपरिचित परिवारों का मिलन है, जिसमें कन्या को अपने परिवार से दूसरे परिवार में जाकर आत्मसात होना पड़ता है। जन्म से जिस परिवार में वह शिक्षा – दीक्षा प्राप्त करती है,…

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उत्साह बढ़ाए प्र्रशंसा के दो बोल /Words of praise to increase enthusiasm

प्रशंसा के दो बोलों में बड़ा ही जादुई असर होता है। वे किसी के भी जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन लाने में समर्थ होते हैं। वे व्यक्ति को जबरदस्त आत्मविश्वास से भर देते हैं। प्रशंसा पाकर…

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कैसे बुझे ईष्र्या की आग ? How to control your jealous emotions

अपने पति या मंगेतर को किसी अन्य महिला के साथ ज्यादा घुलते -मिलते या उसके प्रति कुछ ज्यादा आकर्षण देखकर ईष्र्या – भाव उत्पन्न होना स्वाभाविक है। पर यही ईष्र्या अगर हद से ज्यादा बढ़…

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लोगों का दिल जीतने में हों कामयाब/How to be successful in winning hearts ?

हर किसी को खुश रख पाना मुश्किल काम है। किंतु यदि कुछ सावधानी बरती जाए तो, व्यवहार तथा बातचीत से हम लोगों के दिल जीतने में कामयाब हो सकते हैं। इसका पहला उपाय तो यही…

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पत्नी की सेक्स इच्छा को भी समझें /Understand your wife’s sex desire also !

विवाह स्त्री पुरूष को दाम्पत्य जीवन की डोर से बांधता है। इससे स्त्री पुरूष को न केवल साथ रहने की सामाजिक स्वीकृति व सुविधा मिलती है, अपितु पति व पत्नी दोनों का ही एक दूसरे…

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तलाश है एक कमाऊ पत्नी की / In search of an earning wife.

“28 वर्षीय स्वस्थ, सुन्दर एवं स्मार्ट युवक के लिए घरेलू, सुन्दर, सुशिक्षित वधु चाहिए। नौकरीपेशा कन्या को वरीयता।“ “36 वर्षीय, केंद्रीय सेवारत विघुर, दो पुत्र 5 वर्ष व 7 वर्ष हेतु गृह कार्य में दक्ष, सुयोग्य…

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परिवार में दूसरे बच्चे को ना लाने का निर्णय करने से पहले इकलोते बच्चे की भी राय जरुरी

बालकनी में अकेला खड़ा पांच साल का पिंकू इधर उधर झांक रहा था, सामने नजर पड़ी तो देखा छवि अपने भाई के साथ खेल रही है। पिंकू भी उसके साथ खेलने के लिए दौड़ पड़ा,…

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जब वैवाहिक जीवन में एक पड़ाव के बाद आपके पत्नी का आपसे सेक्स करने का रूचि ख़तम सा हो जाता है

हमारे पड़ोसी मिस्टर संधीर सक्सेना एक चालीस वर्षीय खुशमिजाज व्यक्ति हैं। उनकी श्रीमतीजी की आयु करीब 35.36 के आसपास है। घर में दो छोटे बच्चे हैं। छोटा सा सुखी परिवार है। एक दिन सुधीर ने…

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यह प्यार है या खुमार

‘आंटी देखिए‘, पड़ोस की नन्ही किशोरी निकिता ने एक मुड़े- तुड़े कागज को मेरे सामने खोलकर रख दिया। किसी पत्रिका से फाड़ा हुआ पन्ना था वह,और पूरे कवर पर छाए हुए थे ‘तृष्णा‘ टी वी…

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औरतें ऐसी ही होती हैं !

कल जब अंतरंग पलों में तुम पलट कर सो गए मैं बहुत आहत हुई यह सोचकर कि अब मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती। लेकिन दूसरे ही दिन जब तुमने कहा आज भी तुम गजब ढ़ाती…

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